| शाशनादेश - 70/2017/75 मु०स० /37-1-2017-8(01)/2017 |
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प्रदेश के समस्त जनपदों में जिलाधिकारियो की अध्यक्षता में गो संरक्षण समितिया गठित किये जाने विषयक शंसनादेश संख्या – 70/2017/75 मु०स० /37-1-2017-8(01)/2017 दिनांक 18 दिसम्बर 2017 संलग्न है | इस समित मे उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग द्वारा दो गो-सेवा प्रेमी व्यक्ति सदस्य के रूप मे नामित किये जाने है | आपसे अनुरोध है की अपने जनपद के कतिपय गो-सेवा प्रेमी व्यक्तियों के नाम सुझायें ताकि उन पर व अन्य स्रोतों से प्राप्त व्यक्तियों के नाम पर विचार कर दो गो- सेवा प्रेमी व्यक्ति आपके जनपद की गो संरक्षण समित मे उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग द्वारा सदस्य के रूप मे नामांकित किये जा सकें |
उपयुक्त नामांकन की प्रतीक्षा किये बिना ही कृपया अपने जनपद की गो संरक्षण समित की बैठक शीघ्र आयोजित करने का कष्ट करें ताकि आपके व अन्य अधिकारियो तथा जनपद की समस्त निबंधित गोशालाओ के प्रतिनिधियों द्वारा गोवंश संरक्षण हेतु समन्वित कार्रवाही सुनिश्चित की जा सके | बैठक का एजेंडा निम्नानुसार रखा जा सकता है:
2. गोशाला को स्वावलम्वन की और बदने हेतु बायोगैस, कम्पोस्ट,पंचगव्य से बनाये जाने वाले विभिन्न पदार्थो तथा साबुन, अगरबत्ती, मच्छर भगाने की कायल,गोनायल (गोमूत्र से बनी फिनायल), औषधियों आदि के उत्पादन एवं विक्रय में सहायता प्रदान करना | 3. गोशालाओ को केंद्र बनाते हुए आस-पास के क्षेत्र मे गो आधारित जैविक कृषि एवं बागवानी का विकास करना – कृषि विभाग एवं उध्यानबिभाग आस-पास के किसानों को गोशाला से गोबर व गोमूत्र से बने खाद व कीटनाशक का उपयोग के जैविक कृषि एवं बागवानी हेतु प्रेरित करें तथा उनके उत्पाद की गोशाला के बैनर के तहत विक्रय की व्यवस्था हो | इससे किसानो को उत्पाद का अच्छा मूल्य मिलेगा, गोबर गोमूत्र के सदुपयोग होने से गोशाला की आय बढेगी तथा जनसामान्य को बेहतर खाद्यान्न, फल, सब्जी आदि प्राप्त होंगे | 4. गोशालाओ की गोवंश रखने की क्षमता का विकास तथा उनमें वध व तस्करी से बचाये गये गोवंश को रखा जाना | 5. जहां छुट्टा गोवंश के रखे जाने हेतु कांजी हाउस न हो वहां निकट की गोशाला का कांजी हाउस के रूप मे उसकी क्षमता के अनुसार उपयोग किया जाना | 6. जनपद मे गोचर बंजर व अन्य राजकीय भूमियों से अवैध कब्जे हटाकर उन पर चारागाह विकसित किया जाना तथा उनके प्रवंधन मे गोशाला का सहयोग प्राप्त किया जाना | 7. संयुक्त वन प्रवंधन के क्षेत्र का विस्तार किया जाना | अवनत वन भूमियों व ऊसर भूमियो के सुधार हेतु गोबर, गोमूत्र का उपयोग किया जाना | 8. वन विभाग व उध्यान विभाग द्वारा गोबर से बने गमलो का उपयोग किया जाना, राजकीय कार्यालयों की स्वच्छता हेतु गोनाइल( गोमूत्र से बनी फिनाइल) का उपयोग किया जाना, गोबर से बने लठ्ठों का शमशान घाट मैं व सर्दियों मे अलाव जलाने हेतु उपयोग किया जाना आदि| 9. सामाजिक वृक्षारोपण व आरक्षित वन क्षेत्र के वृक्षारोपण मे अधिकाधिक चारा प्रजाति के वृक्ष लगाये जाना | 10. बैलचालित यंत्रो जैसे बैलचालित वाटर पम्प, आटा चक्की, कोल्हू, ट्रेक्टर, जनरेटर, बैलगाड़ी आदि के उपयोग को बढावा देना- उदाहरणत: सी0एस0आर0 (Corporate Social Responsibility) के माध्यम से उन्नत बैलगाड़ियाँ लोगों को उपलब्ध करायी जा सकती हैं | विभिन्न रोजगार योजनओं के अंतर्गत भी बैलचालित उपकरण लेने हेतु सहायता / अनुदान उपलब्ध कराया जा सकता है | 11. जनसामान्य को गोशाला के एक या अधिक गोवंश को एडोप्ट करने हेतु प्रेरित करना, गोशाला मे श्रमदान हेतु प्रेरित करना, गो-ग्रास एकत्रित करने हेतु रिक्शो, बैलगाडियो का संचालन आदि | 12. उध्यमियो को गोशाला के गोबर, गोमूत्र के सदुपयोग हेतु बड़े बायोगैस/ सी0 एन0जी0 प्लान्ट लगाने व पंचगव्य आधारित उध्योग स्थापित करने हेतु प्रेषित करना | 13. गोशालाओ मे भरण पोषण अनुदान हेतु सहायता प्राप्त करने के लिये उनके प्राथना-पत्रों का उत्तर प्रदेश गोशाला आयोग को प्रेषण | 14. जनपद मे आवश्यकतानुसार अन्य स्थानों पर गोवंश आश्रय स्थल स्थापित करने पर विचार | उपरोक्त के अतिरिक्त बैठक मे सदस्यों द्वारा उठाये गये अन्य बिन्दुओ पर भी सम्यक विचार व कार्रवाही किया जाना उचित होगा | कृपया उपरोक्तानुसार अपने जनपद की गो संरक्षण समित की बैठक शीघ्र आयोजित कर उसके कार्यवृत्त उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग को उपलब्ध कराने का कष्ट करे | |




