राष्ट्र की कृषि को सुद्रढ़ स्तम्भ के रूप मे विकसित करने, कृषकों का सर्वांगीण विकास करने, विकृत एवं प्रदूषित होते पर्यावरण को संतुलित करने, दूषित वायु, मृदा के शोधन एवं ग्रामीण कुटीर उद्योगों को विकसित कर गाँधी जी के स्वप्न को साकार करने के लिये आज गोपालन, गोवंश संरक्षण एवं संवर्धन की महती आवश्यकता है | भारतीय कृषि की आधारशिला गोवंश है |
गोवंश सार्वभौमिक सर्वमान्य एवं सदोपयोगी है |
गोवंश संरक्षण एवं संवर्धन समय की मांग है | वर्ष 1997 में गोवंश की संख्या 19.8 करोड थी | वह 2003 मे घटकर 17.8 करोड़ रह गयी| वर्ष 2009 मे लगभग 15 करोड़ रह गयी | इस प्रकार प्रत्येक 5 वर्षो में लगभग 2 करोड़ गोवंश की दर से संख्या में कमी आई | इस प्रकार राष्ट्र में गोवंश की संख्या निरंतर कम हो गयी| उल्लेखनीय है कि देश में आबादी प्रतिवर्ष 2 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है|
नई तकनीक जैसे कृत्रिम गर्भाधान, भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीय तथा सेक्स सर्टेड सीमेन का उपयोग करते हुए गोवंश के सुनियोजित नस्ल सुधार की भी आवश्यकता है |
उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग गोशालाओं में संधारित गोवंश के भरण पोषण हेतु अनुदान देने के साथ - साथ पंचगव्य उत्पादों को प्रोत्साहन देकर तथा बायो गैस एवं सी० एन० जी० प्लांट आदि की स्थापना में सहयोग कर गोशालाओं को स्वावलंबी बनाने हेतु सतत् प्रयत्नशील है | गोशालाओं के प्रबंधको को विशेषज्ञों से प्रशिक्षण दिला कर उन्हें गोशाला प्रबंधन हेतु कुशल बनाया जा रहा है.
उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग वर्तमान में सम्पूर्ण प्रदेश में गोशालाओं का संरक्षण एवं संवर्धन, गो आश्रय स्थलों की स्थापना, प्रत्येक जनपद में वृहद गोवंश आश्रय स्थल की स्थापना, कारागारों में गोशालाओं की स्थापना, मा० मुख्यमंत्री जन सहभागिता गोपालन योजना आदि के माध्यम से गो संरक्षण संवर्धन हेतु बड़े कदम उठाये जा रहे है |
गोसेवा में संघर्ष, समन्वय, समर्पण सभी का महत्व है परन्तु मा० मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की दृढ इच्छा, दृढ संकल्प ही सबसे बड़ा आधार है | हमे ध्येयवादी होना चाहिये क्योकि ध्येय में बड़ी शक्ति है | प्रबल आत्मविश्वास से ही लक्ष्य की प्राप्ति होती है |




